आई.एफ. डब्लू.जे. प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौर और पत्र कारिता की अस्मिता और ओरण-गोचर पर आंच

 आई.एफ. डब्लू.जे. प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौर और पत्र कारिता की अस्मिता और ओरण-गोचर पर आंच -- कैलाश चंद्र कौशिक        जयपुर! पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग द्वारा कुचलने कुचक्र चालू है। जैसलमेर की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक धरोहर, 'ओरण एवं गोचर' भूमि के संरक्षण की आवाज उठाना आज एक वरिष्ठ पत्रकार के लिए उनके अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।

​आईएफडब्ल्यूजे (IFWJ) के प्रदेशाध्यक्ष  उपेंद्र सिंह राठौड़, जिन्होंने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के नाम पर अरबों-खरबों के निवेश की आड़ में हो रही ओरण-गोचर भूमि आवंटन की कथित धांधलेबाजी के खिलाफ स्वर मुखर किया, आज वे स्वयं सरकारी तंत्र के भीषण कोपभाजन बने हुए हैं। 

जब जुलाई माह में इन संवेदनशील भूमियों के आवंटन की प्रक्रिया पुनः शुरू हुई, तो जन-आक्रोश के बीच श्री राठौड़ ने एक पत्रकार और संगठन प्रमुख के उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। विडंबना यह है कि जनहित में उठाई गई इस आवाज का उत्तर प्रशासन ने संवाद के बजाय प्रतिशोध से दिया। ​सत्ता और पद के अहंकार में डूबी प्रशासनिक मशीनरी ने कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर श्री राठौड़ के पिछले 23 वर्षों से वैध रूप से संचालित 'स्वाद रेस्टोरेंट' और रिसोर्ट के लाइसेंस को रातों-रात निरस्त कर दिया। कार्रवाई की क्रूरता का आलम यह रहा कि 22 दिसंबर को न्यायालय से 'स्टे ऑर्डर' प्राप्त होने के बावजूद, प्रशासनिक दबाव कम होने के बजाय और अधिक सघन हो गया। जैसे ही जनता ने 'कलेक्टर हटाओ, जैसाण बचाओ' के नारे बुलंद किए, अगले ही दिन भारी पुलिस जाब्ते के साथ रेस्टोरेंट में रखे लाखों रुपये के सामान को बेकद्री से जब्त कर संस्थान को सील कर दिया गया।

​यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति या एक संस्थान की आर्थिक क्षति का नहीं है, बल्कि यह उस भयावह प्रवृत्ति का परिचायक है जहाँ सच लिखने वाली कलम को उसकी आजीविका छीनकर खामोश करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित पत्रकार द्वारा साक्ष्यों सहित केंद्रीय मंत्रियों और आपके कार्यालय तक गुहार लगाने के बावजूद, एक युवा जिला अधिकारी का यह निर्भीक दमनकारी रवैया शासन की छवि को धूमिल कर रहा है।

इस प्रकरण की किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष एजेंसी से जाँच करवाई जाए। ओरण-गोचर जैसी पवित्र भूमियों के आवंटन में हो रही अनियमितताओं को रोका जाए और श्री उपेंद्र सिंह राठौड़ को प्रशासनिक उत्पीड़न से मुक्त कर उन्हें यथोचित न्याय प्रदान किया जाए, ताकि प्रदेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मर्यादा बदस्तूर बनी रहे! माननिय न्यायालय का सम्मान जिला कलेक्टर को करना चाहिए? 








इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पुलिस पाटन द्वारा हथियार की नोक पर वाहन लूट करवाने वाला अंतर्राज्यीय गैंग का सरगना गिरफ्तार

चोंमू के निकट ग्राम पंचायत कानपुरा के शंभूपुरा गांव में तालाब की भूमि पर कब्जा करने का मामला

सामूहिक विवाह सम्मेलन में धूम धाम व हर्षोल्लास से सम्पन्न हुई 9 जोडो़ की शादी