होलिका दहन: अटूट विश्वास की जीत और अधर्म के अंत का पावन पर्व। लोगों ने उत्साह के साथ मनाया होली का पर्व

होलिका दहन: अटूट विश्वास की जीत और अधर्म के अंत का पावन पर्व। लोगों ने उत्साह के साथ मनाया होली का पर्व

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
 
(माचाड़ीअलवर):- माचाड़ी-प्राचीन काल में अलवर जिले की राजधानी रहे माचाड़ी कस्बा निवासी शिवदत्त शर्मा राजपुरोहित ने बताया कि होली का दहन अटूट विश्वास की जीत और अधर्म के अंत का पावन पर्व है। होलिका दहन का पर्व केवल लकड़ियों का ढेर जलाने की परंपरा भर नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर छिपे अहंकार, ईर्ष्या,द्वेष और बुराइयों को अग्नि में समर्पित कर आत्मशुद्धि का संकल्प लेने का प्रतीक है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि जब समाज में ‘अच्छाई’ का साथ देने वाले लोग संगठित होते हैं, तब ‘बुराई’ स्वतः ही पराजित हो जाती है।
भक्त प्रह्लाद के विश्वास की विजय और अधर्मी अहंकार का अंत 
*होलिका दहन की कथा* होली का दहन की कथा से लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए कि भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और हिरण्यकश्यप के अहंकार के टकराव की अमर गाथा है। दैत्यराज हिरण्यकश्यप को अपनी शक्ति पर इतना घमंड था कि उसने स्वयं को ही भगवान घोषित कर दिया। किंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था।
हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कई प्रकार से मृत्यु के घाट उतारने का प्रयास किया, परंतु हर बार उसकी अडिग आस्था और भगवान के प्रति समर्पण ने उसे सुरक्षित रखा। अंततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका का सहारा लिया, जिसे वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी।
होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, पर परिणाम इसके विपरीत हुआ—अधर्म का साथ देने वाली होलिका जलकर भस्म हो गई और सत्य एवं भक्ति के मार्ग पर चलने वाले प्रह्लाद का बाल भी बाँका नहीं हुआ। यह घटना इस सत्य को स्थापित करती है कि अंततः विजय धर्म और विश्वास की ही होती है।
समाज का दायित्व: अच्छाई का साथ दें
यह कथा हमें गहरा संदेश देती है कि बुराई की उम्र अधिक नहीं होती—यदि समाज सजग रहे और सत्य का समर्थन करे। अक्सर बुरे लोग इसलिए प्रभावी हो जाते हैं क्योंकि अच्छे लोग मौन रह जाते हैं या संगठित नहीं होते।
होलिका दहन हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागकर सत्य, प्रेम, सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलें। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अच्छाई का साथ देगा, तब अधर्म और अन्याय स्वयं समाप्त हो जाएंगे।
आप सभी को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं।
ईश्वर करे यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रकाश लाए। शिवदत शर्मा ने बताया की होली का दहन के दुसरे दिन धुलंडी का त्योहार त्योहार मनाया जता है इस दिन सभी लोग रंगों का त्यौहार मना कर सब बुराईयों को छोड़कर होली खेलते हैं। एक दूसरे से भाईचारा निभाते हैं।माचाड़ी कस्बे सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्रों में होली का त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया।

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