उदयपुर में फूलों की होली और गौर पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न*
उदयपुर में फूलों की होली और गौर पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न*
उदयपुर। भूपालपुरा एल रोड स्थित हरे कृष्ण आंदोलन, उदयपुर द्वारा गुरुवार को शिल्पग्राम के समीप रिसॉर्ट में गौर पूर्णिमा महोत्सव एवं फूलों की होली का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और उदयपुरवासियों ने भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दिव्य महाभिषेक से हुई। अभिषेक क्रम में तिल लेप स्नान, पंचगव्य स्नान, पंचामृत स्नान, सात प्रकार के फलों के रस से स्नान, फल एवं पुष्प सहस्त्रधारा, हल्दी लेपन, सात प्रकार की आरती तथा सात प्रकार के पुष्पों द्वारा अभिषेक किया गया। विशेष रूप से नौ पवित्र नदियों के जल का आवाहन 21 कलशों में किया गया, और उन्हीं कलशों के पावन जल से भगवान का महाभिषेक विधिपूर्वक संपन्न हुआ।
इसके साथ ही संकीर्तन, भजन, आध्यात्मिक वीडियो प्रदर्शन तथा श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन हुआ। केंद्र प्रमुख मैत्रेय प्रभु ने अपने प्रवचन में बताया कि श्री गौरांग महाप्रभु स्वयं श्रीकृष्ण हैं, जिन्होंने कलियुग में भक्त के वेश में अवतार लेकर हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से प्रेम-भक्ति का प्रसार किया। प्रभु ने यह भी बताया कि श्री गौरांग महाप्रभु का अवतरण आज से 540 वर्ष पूर्व 1486 ईस्वी में मायापुर में हुआ। उन्होंने कलियुग में भगवान के पवित्र नाम के जप के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला।
मैत्रेय प्रभु ने बताया कि श्रील प्रभुपाद ने श्री चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं के पदचिह्नों पर चलते हुए हरे कृष्ण महामंत्र का प्रचार संपूर्ण विश्व में किया और भक्ति आंदोलन को वैश्विक पहचान दिलाई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही फूलों की होली, जिसमें रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक पुष्पों से होली खेली गई। आयोजकों ने संदेश दिया कि होली का उत्सव नशामुक्त, प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया जाए। पहले पुष्प भगवान को अर्पित किए गए और फिर उन्हें प्रसाद रूप में श्रद्धालुओं के साथ साझा किया गया।
समापन पर सभी उपस्थित जनों के लिए भव्य महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में शामिल उदयपुरवासियों ने कहा कि “यह हमारे जीवन की सबसे सुंदर होली थी—जहां भगवान गौरांग का प्रेम, पवित्र नाम का संकीर्तन और फूलों की होली एक साथ मिलकर आध्यात्मिक आनंद के महासागर में ले गए।”
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