मनोवैज्ञानिक फिल्म ‘द मिरर रूम’ को 16 अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड युवा निर्माता प्रतीक कुमावत का सम्मान*
*मनोवैज्ञानिक फिल्म ‘द मिरर रूम’ को 16 अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड
युवा निर्माता प्रतीक कुमावत का सम्मान*
उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल।
वर्तमान समय में बढ़ते मानसिक तनाव, उद्यमिता से जुड़ी असुरक्षा और व्यक्ति के भीतर जन्म लेते अघोषित भय जैसे जटिल विषय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने वाली मनोवैज्ञानिक फिल्म ‘द मिरर रूम’ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इस फिल्म को अब तक 16 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
इसी उपलब्धि के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति एवं आलोक इंटरेक्ट क्लब के संयुक्त तत्वावधान में फिल्म के निर्माता-निर्देशक प्रतीक कुमावत तथा फिल्म से जुड़े कलाकारों का आलोक संस्थान के चित्तमत सभागार में सम्मान किया गया। समारोह के दौरान फिल्म को प्राप्त सभी 16 अंतर्राष्ट्रीय अवार्डों का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप कुमावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘द मिरर रूम’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि आज के समय में युवाओं के भीतर पनप रहे मानसिक तनाव और काल्पनिक भय को समझने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता, प्रतिस्पर्धा और असफलता के डर के कारण व्यक्ति कई बार ऐसी परिस्थितियों से भयभीत हो जाता है, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं होतीं। फिल्म ने इसी मनोवैज्ञानिक भ्रम और आंतरिक संघर्ष को अत्यंत गहराई और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।
डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि यह फिल्म युवाओं को यह संदेश देती है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि गंभीर सामाजिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक विषयों पर भी प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित कर सकता है। उन्होंने इस बात की विशेष सराहना की कि फिल्म को यूट्यूब एवं ओटीटी जैसे अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाया गया।
उन्होंने फिल्म की उच्चस्तरीय तकनीकी गुणवत्ता की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि सिनेमैटोग्राफी, साउंड डिजाइन, एडिटिंग और प्रस्तुति के स्तर पर ‘द मिरर रूम’ एक अंतर्राष्ट्रीय मानकों की फिल्म है, यही कारण है कि इसे विश्व के अनेक प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में सम्मान प्राप्त हुआ।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि उदयपुर जैसे सांस्कृतिक नगर से निकलकर किसी युवा फिल्मकार का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम का समापन सम्मानित कलाकारों के अभिनंदन और तालियों की गूंज के साथ हुआ।
फिल्म का लेखन और निर्देशन प्रतीक कुमावत ने किया है और इसका निर्माण डॉ. प्रदीप कुमावत ने किया है। रजनीश कुमावत सहायक निर्देशक हैं, जबकि हितिशा खथुरिया एसोसिएट प्रोड्यूसर हैं। कांता कुमावत और निशचय कुमावत फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। सिनेमैटोग्राफी प्रतीक कुमावत और रजनीश कुमावत द्वारा की गई है। फिल्म की कहानी, पटकथा, एडिटिंग और साउंड मिक्सिंग भी प्रतीक कुमावत ने स्वयं की है। फिल्म में आदित्य तालच, कुणाल दशोरा, शालू खथुरिया, दिव्येश वशिष्ठ, निशचय कुमावत, मनमोहन भटनागर, कमलेश साल्वी और जगदीश रावल प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं।
