पेंशनर्स समाज का जिला वार्षिक अधिवेशन व सम्मान समारोह सम्पन्न
*पेंशनर्स समाज का जिला वार्षिक अधिवेशन व सम्मान समारोह सम्पन्न
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*पेंशनर्स को 8 वें वेतन आयोग का पूर्ण लाभ विभेदकारी नीति के बगैर देय हो - भंवर सेठ*
उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज। "पेंशनर दिवस" पर "राजस्थान पेंशनर समाज" जिला शाखा उदयपुर द्वारा राजकीय सेवा से सेवानिवृत पेंशनर्स का "जिला वार्षिक अधिवेशन, 70 वर्षीय अग्रजों तथा भामासाहों का सम्मान समारोह" नाइयों की तलाई स्थित तेरापंथ भवन के सभागार में अतिथि अतिरिक्त निदेशक (पेंशन) रूचि प्रियदर्शी, कोषाधिकारी महेन्द्र सिंह सीमार (उदयपुर ग्रामीण), ललित पानेरी (समाजसेवी एवं उद्योगपति), आनन्द गुप्ता (अध्यक्ष-भारतीय चिकित्सा संघ), डॉ आशीष सिंघल, डॉ राहुल जोशी (ऑर्थोपीड़िक सर्जन), ओ पी सिंघल (संरक्षक-पेंशन समाज), डॉ आनंद कुमार जैन तथा जिलाध्यक्ष भंवर सेठ की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। माँ सरस्वती के दीप प्रज्जवलन व संगीतकार अनिल शर्मा व आनन्द शर्मा की संगीतमय ईश वंदना व स्वागत गीत से अधिवेशन का शुभारम्भ हुआ।
स्वागत उदबोधन में भंवर सेठ ने पेंशनर्स को "पेंशनर दिवस" की शुभकामनाएं देते हुए खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है ज़ब भारत सरकार ने 8 वें वेतन आयोग का गठन कर पहली बार किसी महिला न्यायाधिपति रंजना प्रकाश देसाई को आयोग का अध्यक्ष, प्रोफेसर पुलक घोष (आईआईएम बैंगलोर) तथा पंकज जैन (सचिव भारत सरकार) को सदस्य नियुक्त किया है। सेठ ने वेतन आयोग पर भरोसा जताया है कि वे पेंशनर्स के हितों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे तथा जो विसंगतियाँ है उन्हें दूर कर पेंशनर्स को दो हिस्सों में बँटने नहीं देंगे।
सेठ ने यह भी कहा कि टर्म एवं रेफरेन्स को लेकर देश में अनेक शंकाएं पैदा हुई है क्योंकि संसद में एक जवाब में सरकार ने कहा कि इस बार के वेतन निर्धारण में पुराना महंगाई भत्ता मर्जर नहीं किया जाएगा इससे देश भर में कर्मचारी संघो एवं पेंशनर्स संगठन के मन में अनेक शंकाएं है। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा पारित वित्त विधेयक का भी उल्लेख किया जिसकी मंशानुसार पेंशनर्स को दो भागों (दिनांक 1 जनवरी 2026 से पूर्व सेवानिवृत तथा 1 जनवरी 2026 के बाद सेवानिवृत) में विभक्त किया है जो कि डी एस नकारा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया से सम्बन्धित वाद में माननीय सुप्रीम कोर्ट की संवेधानिक पीठ द्वारा पारित निर्णय के विरुद्ध है। इसी प्रकार केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 3 नवंबर 2025 को "राजपत्र" में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार 8 वें वेतन आयोग (CPC) के टर्म ऑफ़ रेफ़्रेन्स (TOR) अनुसार 1 जनवरी 2026 के पश्चात ऐसे कर्मचारी जो OPS (ओल्ड पेंशन स्कीम) के अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने के अधिकारी हैं उनकी पेंशन के पुनरीक्षण के लिए UNFUNDEND COST को मद्धेनजर रखकर सिफारिश करने की अपेक्षा की गई है। सातवें वेतन आयोग तक केन्द्रीय वेतन आयोग सीपीसी की सिफारिश को राज्य सरकारें राज्य पेंशनर्स हेतु यथावत करती रही है अथवा अपनी पेंशन नीति निर्धारित करती रही है। जबकि उच्चतम न्यायालय की संवेधानिक खंडपीठ ने पेंशन को एक आस्थगित वेतन माना है ऐसी स्थिति में सरकारों के पास यह आस्थगित वेतन (deferred wages) अपने आप में एक काल्पनिक फण्ड का रूप होने का संकेत है। सरकारी कार्मिकों के वेतन एवं पेंशन का भुगतान सरकार की समेकित निधि से होता है। पुरानी वेतन स्कीम के तहत मिलने वाली पेंशन गैर अंशदायी है इसे प्रतिबद्ध व्यय माना जाता है इसका बजट तैयार कर बजट स्वीकृत किया जाता है। पेंशन भुगतान सरकार का एक वैधानिक दायित्व है। पेंशन भुगतान न केवल पिछली सेवाओं के लिए एक पुरस्कार के रूप में है बल्कि वृद्धावस्था के प्रभाव से बचने के लिए माना जाता है। सेठ ने 17 दिसंबर 1982 को उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायमूर्तियों की पीठ द्वारा पेंशन को परिभाषित करने वाले उस कथन का भी जिक्र किया कि *"पेंशन ना तो कोई भेंट है ना कोई कृपा की वस्तु जो कि नियोजन की स्वेच्छा पर निर्भर है, पेंशन भिक्षा नहीं है, पेंशन एक अनुदायिक संदाय नहीं अपितु यह जीवन के स्वर्णिम दिनों में नियोक्ता सरकार के लिए किए गए श्रम, बहाये गए पसीने का प्रतिफल है।"* इसलिए हम पेंशनर समाज भारत सरकार से निवेदन करते हैं कि पेंशन में किसी प्रकार की विभेदकारी नीति नहीं लाते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार पूर्व की भांति यथावत लागू रखें। यदि सरकार ने इसमें फेरबदल करने का प्रयास किया तो यह पेंशनर्स के साथ अन्याय होगा और उसे देश का पेंशनर्स कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
अतिरिक्त निदेशक (पेंशन) रूचि प्रियदर्शी ने कहा कि पेंशनर्स के लिए कार्यालय अतिरिक्त निदेशक (पेंशन) के मेरे सहकर्मी सदैव आपकी समस्याओं का त्वरित समाधान करते हैं। प्रतिदिन का कार्य उसी दिन संपादन की वजह से कार्यालय में कोई भी कार्य लंबित नहीं है।
"भारतीय चिकित्सा संघ" के अध्यक्ष डॉ आनन्द गुप्ता ने पेंशनर्स समाज के लिए बेहतरीन कार्य करने के लिए जिलाध्यक्ष भंवर सेठ व उनकी सम्पूर्ण जिला कार्यकारिणी को शुभकामनायें दी। उन्होंने पेंशनर्स को स्वस्थ रहने के कुछ टिप्स भी दिए। अन्य वक्ताओं में कोषाधिकारी महेन्द्र सिंह सीमार, ललित पानेरी, dr आशीष सिंगल व डॉ राहुल जोशी ने अपने विचार व्यक्त किए। निःशुल्क चिकित्सा शिविर स्टर्लिंग हॉस्पिटल के डॉ सौरभ गोयल एवं डॉ रशेष पोथीवाला के नेतृत्व में लगाया गया। जिसमें हृदय रोग, अस्थि रोग, मधुमेह, रक्तचाप आदि की निःशुल्क जाँच कर उपचारात्मक परामर्श दिया।
अधिवेशन में पेंशनर्स समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य के लिए मांगीलाल मेनारिया को "भामाशाह", सीता शर्मा को "पेंशनर रत्न", देवीलाल डांगी, मोहनपुरी गोस्वामी, सुशीला को "पेंशनर भूषण", प्रेमकुंवर जैन, रजनी जोशी को "पेंशन गौरव" सम्मान से नवाज़ा गया। तथा 70 वर्षीय अग्रज पेंशनर्स ( कुल 135) का शाल, पगड़ी, ऊपरना, माला तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।साथ ही कोष कार्यालय के कार्मिकों की सराहनीय सेवाओं के लिए अभिनन्दन किया।
अधिवेशन में वरिष्ठ सदस्य कृष्ण चन्द्र श्रीमाली, मंत्री बाबूलाल जैन, कोषाध्यक्ष वरदान मेहता, भंवर सिंह राठौड़, जगदीश शर्मा, मुरलीधर गट्टानी, प्रकाश कटारिया कन्हैया लाल पारीक, गणपत दवे, नरेन्द्र सेठ, ओंकारलाल मेवाड़ा, सुरेश चपलोत, कुसुम माहेश्वरी, प्रवक्ता विजय सारस्वत सहित उपशाखा अध्यक्ष वल्लभनगर से राजमल ओसवाल, कानोड़ से जवाहर लाल नागौरी, भीण्डर से मीठू लाल फांदोत, खेरवाड़ा से जीवत राम निनामा गोगुन्दा से दयाराम कुम्हार, झाड़ोल से नारायण लाल पुजारी, ऋषभदेव से भूपेन्द्र जैन, मावली से बसंत त्रिपाठी व नाथूलाल वैरागी, कोटड़ा से भँवरलाल गमेती सहित सम्पूर्ण जिले से लगभग 700 से अधिक पेंशनर्स उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संयुक्त संयोजन कुसुम माहेश्वरी एवं विजय सारस्वत ने तथा कृष्ण चन्द्र श्रीमाली ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

